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हर्निया: यह गांठ क्या कहती है और ऑपरेशन कब जरूरी हो जाता है

8 सितंबर 2026 · Dr Murlidhar Boob

द्वारा चिकित्सकीय समीक्षा की गई डॉ. मुरलीधर बूब — एमएस, एफएआईएस, डीएलएस, एफएमएएस, लेप्रोस्कोपिक सर्जन और सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, शुभम हाई-टेक हॉस्पिटल और टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर, अमरावती।

ज्यादातर हर्निया संयोग से पकड़ में आते हैं। कोई बोरी उठाता है, जांघ के ऊपर कुछ खिंचने-सा महसूस होता है, और शाम तक वहां एक मुलायम सूजन दिखने लगती है। कोई महिला नहाते समय नाभि के पास छोटा-सा उभार देखती है। किसी का वर्षों पुराना ऑपरेशन का निशान चुपचाप बाहर की ओर उभरने लगता है। लगभग हर मामले में शुरुआत में दर्द नहीं होता — और ठीक इसीलिए इसे महीनों, कभी-कभी वर्षों तक टाल दिया जाता है।

मुझे हर हफ्ते दोनों तरह के मरीज मिलते हैं: वे जो समय रहते आए और जिनका नियोजित, सीधा-सादा ऑपरेशन हुआ, और वे जो रात में ऐसे हर्निया के साथ पहुंचे जो खतरनाक बन चुका था। इन दोनों के बीच का फर्क शायद ही कभी किस्मत का होता है। वह अक्सर जानकारी का होता है।

हर्निया असल में है क्या

आपके पेट के अंग मांसपेशियों की एक दीवार के भीतर रहते हैं। हर्निया उसी दीवार में बना छेद या कमजोर जगह है, जिसमें से चर्बी या आंत का कोई हिस्सा बाहर निकल आता है और वही उभार बनता है जो आपको दिखता या महसूस होता है।

बस इतनी-सी बात है। यह एक यांत्रिक समस्या है — एक छेद — न कोई संक्रमण, न कोई कमी, और न ही ऐसा कुछ जिसे शरीर खुद जोड़ लेता हो।

जगह के हिसाब से इसके नाम अलग हैं:

  • इंग्वाइनल — जांघ और पेट के जोड़ पर। सबसे आम, और पुरुषों में कहीं ज्यादा।
  • अम्बिलिकल या पैरा-अम्बिलिकल — नाभि पर या उसके ठीक बगल में।
  • इंसिजनल — पेट के किसी पुराने ऑपरेशन के निशान से।
  • फीमोरल — जांघ के ऊपरी हिस्से में, महिलाओं में ज्यादा, और इसमें आंत फंसने की आशंका अधिक।

हायटस हर्निया बिल्कुल अलग चीज है — इसमें पेट का कुछ हिस्सा डायफ्राम के ऊपर खिसक जाता है, और गांठ के बजाय सीने में जलन और खट्टी डकार जैसी शिकायतें होती हैं। इस पर मैंने अलग से पुरानी एसिडिटी और सीने की जलन पर लिखा है।

एक झटपट स्व-जांच

आईने के सामने खड़े होकर इन बातों पर गौर कीजिए:

  • खड़े होने, खांसने, जोर लगाने या वजन उठाने पर क्या सूजन उभरती या बढ़ती है?
  • सीधा लेटने पर क्या वह दब जाती या गायब हो जाती है?
  • दिनभर के काम के बाद क्या भारीपन और खिंचाव-सा दर्द रहता है, जो रातभर में कम हो जाता है?
  • क्या यह रातोंरात नहीं, बल्कि महीनों में धीरे-धीरे बढ़ी है?
  • किनारे पर हल्के से दबाने पर क्या त्वचा के नीचे कोई नरम खाली जगह महसूस होती है?

इनमें से ज्यादातर का जवाब “हां” है तो बात हर्निया से अच्छी तरह मेल खाती है। यह निदान नहीं है, लेकिन एक और साल इंतजार करने के बजाय जांच करा लेने की ठोस वजह जरूर है।

“दर्द तो बिल्कुल नहीं होता। क्या इसे ऐसे ही छोड़ दूं?”

अभी छोड़ सकते हैं — बस यह समझ लीजिए कि आप चुन क्या रहे हैं। दर्दरहित हर्निया, जो आसानी से अंदर चला जाता है, आपात स्थिति नहीं है और इसी हफ्ते ऑपरेशन की मांग नहीं करता। लेकिन वह छोटा भी नहीं होगा। वर्षों में छेद चौड़ा होता है, ज्यादा हिस्सा बाहर आने लगता है, और जो मरम्मत आसान होती वह बड़ा काम बन जाती है। मेरी सलाह आमतौर पर “तुरंत ऑपरेशन कराइए” नहीं होती, बल्कि यह होती है — “अभी ठीक से देख लेने दीजिए, जब तक सारे विकल्प खुले हैं।”

बेल्ट और कसरत इसे ठीक क्यों नहीं कर सकते

यही वह जगह है जहां मैं लोगों को निराश करता हूं। पेट की दीवार के छेद को बंद करने वाली न कोई गोली है, न तेल, न कोई आसन, न कोई खानपान। आसपास की मांसपेशियां मजबूत करना सेहत के लिए अच्छा है, पर उससे छेद नहीं भरता।

हां, उस पर पड़ने वाले दबाव को काबू में रखना चीजों को धीमा जरूर करता है: बढ़ा हुआ वजन घटाना, लंबे समय से चली आ रही खांसी का इलाज कराना, तंबाकू-धूम्रपान छोड़ना, और कब्ज सुधारना ताकि रोज जोर न लगाना पड़े। बेल्ट की एक ही ईमानदार भूमिका है — ऐसे व्यक्ति के लिए उभार को कुछ समय अंदर रखना जिसका अभी ऑपरेशन संभव नहीं। वह सहारा है, इलाज नहीं।

किसमें इंतजार चल सकता है, और किसमें बिल्कुल नहीं

नियोजित सर्जरी ही आम तरीका है। लेकिन इनमें से कुछ भी दिखे तो उसी दिन आइए:

  • गांठ अचानक सख्त हो जाए और अंदर वापस न जाए
  • हल्के दर्द के बजाय उस जगह लगातार तेज दर्द
  • उल्टियां, या पेट फूला रहना और शौच-गैस बिल्कुल न निकलना
  • सूजन के ऊपर लाली, गर्माहट या रंग का काला-सा पड़ना
  • इनमें से किसी के साथ बुखार

ये संकेत बताते हैं कि बाहर निकला हिस्सा फंस गया है और उसका खून का प्रवाह खतरे में है। ऐसा कम होता है — पर यही वजह है कि सर्जन “फसल कटने के बाद करा लूंगा” वाली बात से घबराते हैं।

“ऑपरेशन के बाद क्या यह दोबारा हो सकता है?”

किसी भी हर्निया की मरम्मत के बाद दोबारा होने की आशंका रहती है, और मैं झूठा भरोसा देने के बजाय यह साफ कहना बेहतर समझता हूं। आजकल की मरम्मत में किनारों को सिर्फ सिल देने के बजाय पूरे कमजोर हिस्से को मेश से मजबूत किया जाता है, और नतीजे आपके पिताजी के जमाने से कहीं बेहतर इसी वजह से हैं। ऑपरेशन के बाद आप क्या करते हैं, यह भी मायने रखता है — शुरुआती कुछ हफ्ते वजन उठाने की पाबंदी का पालन, खांसी और कब्ज पर काबू, और वजन संतुलित रखना।

जांच के समय क्या होगा

कुछ भी असहज नहीं, और आमतौर पर ज्यादा समय भी नहीं लगता। मैं आपको खड़ा करके और लिटाकर, दोनों तरह से देखूंगा, क्योंकि कई हर्निया लेटते ही छिप जाते हैं, और जांच के दौरान खांसने को कहूंगा। सूजन छोटी हो या तस्वीर साफ न हो, तो कभी-कभी सोनोग्राफी जोड़ी जाती है।

उसके बाद बातचीत। कौन-सी मरम्मत आपके लिए ठीक रहेगी — खुली या दूरबीन से — यह हर्निया के प्रकार, आकार, दोनों तरफ है या नहीं, पहले हुए ऑपरेशन और आपकी सामान्य सेहत पर निर्भर करता है। मधुमेह, रक्तचाप या हृदय की तकलीफ हो तो पहले कुछ जांचें और फिजिशियन की राय ली जाती है। इन ऑपरेशनों के बारे में आप हमारे प्रोसीजर पेज पर और पढ़ सकते हैं, और ठीक होने का पूरा क्रम हमारी लेप्रोस्कोपी के बाद दिन-प्रतिदिन की गाइड में देख सकते हैं।

मिथक बनाम सच्चाई

मिथक: हर्निया इसलिए हुआ कि वजन गलत तरीके से उठाया, इसलिए भारी काम छोड़ देने से वह अपने आप बैठ जाएगा।

सच्चाई: वजन उठाना अक्सर हर्निया को सामने ला देता है, लेकिन कमजोरी वहां पहले से मौजूद होती है। जोर लगाने से बचना समझदारी है और उससे तकलीफ कम रहेगी — पर उससे छेद बंद नहीं होगा।

छोटा है, तभी दिखा लीजिए

सबसे अच्छा हर्निया ऑपरेशन वह है जिसमें कुछ नाटकीय हो ही नहीं: पहले से तय, छोटे छेद पर, और ऐसे व्यक्ति का जिसे अपनी शुगर और रक्तचाप ठीक करने का समय मिला हो।

अगर आपको या घर में किसी को जांघ के जोड़ पर, नाभि पर या किसी पुराने निशान पर उभार दिखा है, तो शुभम हाई-टेक हॉस्पिटल, अमरावती की हमारी सर्जरी टीम उसे देखकर ईमानदारी से बता देगी कि अभी कुछ करने की जरूरत है या नहीं। +91-8668954915 पर कॉल करें या हमारे संपर्क पृष्ठ के जरिए संपर्क करें।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। कृपया अपनी स्थिति के अनुसार मार्गदर्शन के लिए किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या हर्निया कसरत या दवा से अपने आप ठीक हो सकता है?

नहीं। हर्निया मांसपेशियों की दीवार में बना एक छेद है, और कोई गोली, तेल, मालिश या कसरत छेद को बंद नहीं कर सकती। वजन घटाना, पुरानी खांसी का इलाज कराना और कब्ज ठीक करना उस कमजोर जगह पर पड़ने वाला दबाव जरूर घटाते हैं और हर्निया को बढ़ने से धीमा कर सकते हैं, लेकिन छेद तब तक रहता है जब तक उसकी सर्जरी से मरम्मत न हो। अपवाद सिर्फ शिशुओं की नाभि का छोटा हर्निया है, जो अक्सर पहले कुछ वर्षों में अपने आप बंद हो जाता है।

क्या हर्निया बेल्ट ऑपरेशन का सुरक्षित विकल्प है?

बेल्ट या पट्टा सिर्फ तब तक उभार को अंदर दबाकर रखता है, जब तक आपने उसे पहन रखा है। जो व्यक्ति फिलहाल ऑपरेशन के लायक नहीं है या तारीख का इंतजार कर रहा है, उसके लिए यह वाकई उपयोगी है। लेकिन यह न छेद की मरम्मत करता है, न आंत के फंस जाने से बचाता है — और इसी झूठे आराम की वजह से कई लोग वर्षों बाद कहीं बड़ा हर्निया लेकर आते हैं। इसे अस्थायी सहारा मानिए, इलाज नहीं।

मेरे हर्निया में कभी दर्द ही नहीं हुआ। यह सचमुच कितना जरूरी मामला है?

जो हर्निया मुलायम हो, दर्द न करता हो और आसानी से अंदर चला जाता हो, उसे आमतौर पर नियोजित ऑपरेशन की तरह देखा जाता है, आपातकाल की तरह नहीं — इसलिए आज रात अस्पताल भागने की जरूरत नहीं। फिर भी कुछ वर्षों के बजाय जल्दी दिखा लेना बेहतर है, क्योंकि हर्निया समय के साथ बढ़ता जाता है, और आराम से की गई छोटी मरम्मत, दबाव में की गई बड़ी मरम्मत से कहीं आसान होती है।

अगर गांठ अचानक सख्त और दर्दनाक हो जाए तो क्या करें?

इसे आपात स्थिति मानिए और तुरंत अस्पताल आइए, खासकर अगर गांठ अंदर वापस न जा रही हो, दर्द तेज हो, उल्टियां हो रही हों, या उसके ऊपर की त्वचा लाल या काली-सी पड़ रही हो। इसका मतलब हो सकता है कि फंसे हुए हिस्से का खून का प्रवाह रुक रहा है, और हर्निया की यही एक स्थिति है जिसमें हर घंटा मायने रखता है। उसे बार-बार जोर से दबाने की कोशिश मत कीजिए और सुबह का इंतजार मत कीजिए।

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